विपक्षी दलों का सफाया

हार नहीं समझी जाये

bijay-sir

गत लोकसभा चुनाव में हुयी करारी हार से विपक्ष सदमे में है, होना भी चाहिए पर इसे हार समझ कर सुप्त नहीं हो जाना चाहिए। हार-जीत तो मानव जीवन का एक पहलू है, जनता ने कुछ सोच-समझ कर ही भाजपा नीत मोदी जी को मौका दिया है, कारण यह भी रहा कि १३० करोड़ के भारत को संवारने के लिए कोई अनुभवी नेता होना भी चाहिए था।

आज विपक्ष को चुनौति स्विाकारते हुए जन-जन के बीच जाना चाहिए, लोकहितैषी कार्य करने चाहिए, भ्रष्टाचार की पोल खोलनी चाहिए, भाषायी संस्कृति का विकास करवाना चाहिए, युवाओं की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, पर्यावरण का सुधार करवाना चाहिए, आदि ऐसे कई कार्य हैं जिस पर विपक्ष यदि ध्यान देगा तो विश्वास दिलाता हूँ कि जनता विपक्ष का भी साथ देगी।

आज कई-कई नेता संपर्क में नहीं आते, मोबाइल उठाते नहीं, जनता का दर्द सुनते तक नहीं, इस वर्ष कुछ राज्यों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं, तठस्थ हो जाइये, करारनामा करवायें कि हम उसी को अपना वोट देंगे जो हर महिने नेताजी हमारे क्षेत्र का दौरा करेंगे।
हमें अपने क्षेत्र को स्वच्छ व सुंदर बनाना है तो हमें अपनी शक्ती को पहचानना होगा, दिखाना होगा कि जो हमारे साथ है, हम उन्हीं के साथ हैं, ख्याल रखें, समय खत्म तो सब कुछ खत्म, फिर मिलूंगा आगामी शुक्रवार को…

जय भारत! जय भारतीय संस्कृति!

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